11/11/2015
इन चन्द पंक्तियों के साथ...
कि...
"एक दीया ऐसा भी हो, जो भीतर तलक प्रकाश करे,
एक दीया मुर्दा जीवन में फिर आकर कुछ श्वास भरे !
एक दीया सादा हो इतना, जैसे सादा-सरल साधु का जीवन ,
एक दीया इतना सुन्दर हो, जैसे देवों का उपवन !
एक दीया भेद मिटाये , क्या तेरा -क्या मेरा है,
एक दीया जो याद दिलाये, हर रात के बाद सवेरा है !
एक दीया उनकी खातिर हो, जिनके घर में दिया नहीं,
एक दीया उन बेचारों का जिनको घर ही दिया नहीं !
एक दीया सीमा के रक्षक, अपने भारत के वीर जवानों का ,
एक दीया मानवता - रक्षक, चंद मुठ्ठी भर बचे इंसानों का !
एक दीया विश्वास दे उनको , जिनकी हिम्मत टूट गयी,
एक दीया उस राह में भी हो, जो कल पीछे छूट गयी !
एक दीया जो अंधकार का, जड़ के साथ विनाश करे,
एक दीया ऐसा भी हो, जो भीतर तलक प्रकाश करे, "
जो भीतर तलक प्रकाश करे- - - -
प्रकाशोत्तसव "दीपावली " पर हार्दिक -शुभकामनाएं -