20/09/2026
बिहार बाढ़ की मार झेल रहा है, कई परिवार अपने घर-बार और रोज़गार को लेकर परेशान हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर हजारों-लाखों दीये जलाने का कार्यक्रम हुआ।
सवाल किसी की पूजा या जन्मदिन मनाने का नहीं है, सवाल प्राथमिकता का है। जब देश के प्रधानमंत्री लोगों से तेल बचाने की अपील करते हैं, तो क्या ऐसे अवसरों पर बड़ी संख्या में तेल जलाने से बचाए गए संसाधनों का उपयोग जरूरतमंद परिवारों की मदद में नहीं किया जा सकता?
एक छोटा-सा दीया किसी की आस्था हो सकता है, लेकिन बाढ़ में फंसे परिवार के लिए भोजन, दवा, सुरक्षित घर और राहत ज्यादा जरूरी है।
गंगा के किनारे भगवान की आरती और पूजा हमारी आस्था का हिस्सा है, लेकिन उसी गंगा की बाढ़ से प्रभावित लोगों की जिंदगी बचाना भी इंसानियत और जिम्मेदारी का हिस्सा है।
आज सवाल यही है—जब बिहार के लोग संकट में हैं, तब क्या उत्सव से ज्यादा जरूरी राहत और पुनर्वास पर ध्यान देना नहीं होना चाहिए?
आस्था अपनी जगह है, लेकिन आपदा में इंसान की मदद सबसे बड़ी सेवा है।
बिहार बाढ़ में डूब रहा था, जन्मदिन पर दीये जल रहे थे! सवाल तेल बचाने की अपील पर भी है