11/10/2022
80 90 का दशक
ना सोशल मीडिया
ना ही उच्च स्तरीय VFX
ना घर घर टीवी
सिनेमा तो दूर की बात
बी आर चोपड़ा जी जब महाभारत शूट कर रहे थे तो उनके लिए बड़ा Challange तब आया जब भीष्म पितामह को मारा जाना था। मुकेश साहब ने अपने अभिनय मे जान डाल दी थी।
मुकेश उम्र मे तब तमाम लोग से छोटे थे पर उनके अभिनय ने उनको बहुत बढ़ा दिया था।
पहले यह तय हुआ था की उनको सामान्य तरीके से मार कर फिर अर्जुन अपने तीर से बाद मे एक शैया (तीर की चिता) बनाते और गंगा पुत्र उस पर जाकर गिरते।
पर पूरी टीम के लिए एक बड़ा challenge बन गया की End of Bishma कैसे दिखाया जाए क्यों की मुकेश को कोई मुकेश नही कहता था सभी लोग उनको "पितामह" ही कहते थे....... even पितामह का किरदार श्री केशव पर भी भारी था.........
अब वो समय आ गया जब भीष्म का अंत होने वाला था......
Body shape की प्लेट बनाई गयी आगे और पीछे दोनो ओर के लिए ! आगे थार्मा लगाया गया जिसमे तीर लग सके। प्लेट स्टील की थी जिसमे बाद मे असली लोहे की राड तीर के आकार की Build की गयी थी......
इस दिन के टेक के लिए एक सौ बीस घोड़े चालीस हाथी और बारह हजार सैनिक की भीड़ इकट्ठा की गयी थी...!!!
ये seen shoot के बाद (पितामह के गिरने के बाद) आधे घंटे तक सेट पर सन्नाटा पसरा रहा कुरु और पांडु दोनो ओर से लोग वास्तव मे रोते रहे।
महाभारत के सेट पर अंग्रेजी बोलना मना था लोग अपनी चप्पल बाहर ही उतार कर आते थे......!!
महाभारत रामायण आप के लिए मंचन होगा किरदार होगा हमारे लिए आस्था है!!!!!! आज भी मैं जब सुबह महाभारत देखती हूं तो मैं जमीन पर बैठ कर देखती हूं ....."मैं समय हूं" का म्युजिक जब गूंजता हैं तब मैं उस visual स्क्रीन को ईश्वर समझ कर हाथ जोड़कर प्रणाम करती हूं।
तो कुल मिलाजुलाकर बात यही है की आप रामायण महाभारत के नाम पर अब कुछ भी कूड़ा नही परोस सकते, कलाकार के चयन से लेकर परिधान तक आप को बारीकी से ध्यान रखना होगा।
यदि आप कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र है तो देश का हिंदू भी अपने आराध्य के अपमान के लिए कुछ भी करने को स्वतंत्र है।