28/05/2026
“26 साल पहले… एक छोटे से ठेले से शुरू हुआ था सफर।
ना बड़ी दुकान थी, ना बड़े साधन… बस मेहनत, स्वाद और लोगों का प्यार था।
हर सुबह मेहनत लगी, हर रात एक नया सपना बना।
आज वही ठेला बन चुका है — Suresh Bhojnalay।
जहाँ सिर्फ खाना नहीं, 26 साल की मेहनत और भरोसा परोसा जाता है।
ये सिर्फ रेस्टोरेंट नहीं… हमारे पिता के संघर्ष की कहानी है।”