27/03/2026
तेल संकट बना गेमचेंजर, एशिया में चीनी EV का बढ़ता दबदबा
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़े असर ने इलेक्ट्रिक वाहनों के पक्ष में माहौल को और मजबूत कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने एशियाई देशों को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। इस बदलते परिदृश्य में चीन के इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एशिया, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर मध्य पूर्व पर निर्भर है, अब आयातित ईंधन के जोखिम को कम करने के उपाय तलाश रहा है। क्षेत्र की लगभग 60% तेल आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती है, जहां मौजूदा संघर्ष ने आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है।
ऊर्जा अनुसंधान संस्थानों के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से वैश्विक तेल खपत में पहले ही उल्लेखनीय कमी दर्ज की जा चुकी है। अनुमान है कि पिछले वर्ष EV उपयोग के कारण प्रतिदिन करीब 1.7 मिलियन बैरल तेल की बचत हुई, जो वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में बड़े बदलाव का संकेत है।
चीन इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभर रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा EV उत्पादक होने के साथ साथ चीन ने बैटरी तकनीक, सप्लाई चेन और किफायती उत्पादन में बढ़त हासिल की है। वर्तमान में चीन में नई कार बिक्री का लगभग 50% हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहनों का है, जिससे देश की तेल खपत में करीब 10% तक कमी आई है।
हालांकि घरेलू स्तर पर चीन के EV उद्योग को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। बाजार में बड़ी संख्या में कंपनियों की मौजूदगी के कारण मूल्य युद्ध की स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में कंपनियां बाजार से बाहर हो सकती हैं, जिससे विदेशी बाजारों में विस्तार की होड़ तेज हो गई है।
अमेरिका जैसे बाजारों में टैरिफ बाधाओं के चलते चीनी कंपनियों के लिए प्रवेश सीमित है, ऐसे में एशिया उनके लिए सबसे बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है। इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ती मांग, नीतिगत समर्थन और ईंधन की कीमतों में अस्थिरता EV उद्योग को नई दिशा दे सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह रूस यूक्रेन संघर्ष के बाद यूरोप में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिला, उसी तरह वर्तमान तेल संकट एशिया में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को गति देने वाला साबित हो सकता है।
आने वाले समय में किफायती कीमत, उन्नत बैटरी तकनीक और मजबूत वितरण नेटवर्क वाली कंपनियां इस प्रतिस्पर्धा में आगे रहेंगी। मौजूदा हालात में चीन इस दौड़ में सबसे आगे दिखाई दे रहा है।