Cafe Fitoor

Cafe Fitoor if art is to nourish the roots of our culture, society must set the artist free to follow his vision

एश्ले बताती हैं कि उन्हें अपना देश इसलिए भी पसंद है कि आयरलैंड के 90 प्रतिशत लोग कैथोलिक हैं लेकिन दो साल पहले की जनगणना...
09/07/2017

एश्ले बताती हैं कि उन्हें अपना देश इसलिए भी पसंद है कि आयरलैंड के 90 प्रतिशत लोग कैथोलिक हैं लेकिन दो साल पहले की जनगणना में पता चला कि अब यहां 50 प्रतिशत लोग नास्तिक हैं। यहां के प्रधानमंत्री 38 साल के हैं, नाम है लियो वराडकर। इनके पिता भारतीय थे और मां आयरलैंड की थीं। ये अपने देश के पहले गे प्रधानमंत्री हैं और आयरलैंड के लोग इन्हें खूब सम्मान और प्यार देते हैं।

27 साल की एश्ले सिंगापुर में स्पीच थैरेपिस्ट का काम करती थी, कम उम्र के कारण कोई नौसिखिया न समझे इसलिए वे हमेशा अपनी उम्र बढ़ाकर ही बताती थी। लेकिन एक बार तो उल्टा ही हो...

47 साल की नतालिया इससे पहले 17 साल तक इकॉनोमिस्ट थीं, अमेरिका और यूरोप में बड़े फैशन ब्रांड्स के साथ काम कर चुकी हैं। दु...
29/06/2017

47 साल की नतालिया इससे पहले 17 साल तक इकॉनोमिस्ट थीं, अमेरिका और यूरोप में बड़े फैशन ब्रांड्स के साथ काम कर चुकी हैं। दुनिया भर की सैर की है और न्यूयॉर्क और टोकियो में भी काफी साल रही हैं लेकिन वहां की जिंदगी इन्हें पसंद नहीं आई।

नतालिया स्पेन से हैं, 7 साल पहले इंडिया आई थीं और उन्हें इंडिया इतना पसंद आया कि उन्होंने यहीं मकलॉडगंज के पास भागसू में उन्होंने हैंडीक्राफ्ट्स की दुकान खोल ली, शादी की और यहीं...

अरिरूद्ध और अनुश्री यहां अकेले नहीं हैं, जो धरमकोट में कैफे चलाते हैं। उनके जैसे यहां कई युवा और हैं, जो मुंबई, दिल्ली य...
26/06/2017

अरिरूद्ध और अनुश्री यहां अकेले नहीं हैं, जो धरमकोट में कैफे चलाते हैं। उनके जैसे यहां कई युवा और हैं, जो मुंबई, दिल्ली या किसी और बड़े शहर से आए हैं, वे सभी शहरों की भीड़-भाड़ और जिंदगी से ऊबकर मकलॉडगंज, धरमकोट या भागसू में कैफे चलाते हैं, होटल्स-हॉस्टल्स चलाते हैं या कुछ और काम करते हैं। बल्कि यहां जितने भी कैफे, रेस्टोरेंट्स या छोटे-मोटे होटल्स हैं उनमें से ज्यादातर बाहर से आने वाले युवा ही चला रहे हैं।

अनरिद्ध और अनुश्री 2013 में मुंबई से मकलॉडगंज घूमने आए थे, उन्हें यह जगह इतनी पसंद आई कि फिर दोनों यहां से वापस ही नहीं गए। इससे पहले दोनों मुंबई में एडवरटाइजिंग एजेंसी में...

फैबियो बहुत भुलक्कड़ है, और अपनी इस आदत से परेशान भी है लेकिन सिंथिया को फैबियो का भुलक्कड़ होना बहुत प्यारा लगता है। सि...
25/06/2017

फैबियो बहुत भुलक्कड़ है, और अपनी इस आदत से परेशान भी है लेकिन सिंथिया को फैबियो का भुलक्कड़ होना बहुत प्यारा लगता है। सिंथिया उसे भुलक्कड़ होने के लिए भी प्यार करती है (ऐसी प्रेमिकाएं सच में होती हैं?)।

loading… सिंथिया एक डायरी लिखती है, रोज तो नहीं लिख पाती लेकिन हर दूसरे-तीसरे दिन तो जरूर लिखती है। यह डायरी सिंथिया अपने ब्वायफ्रैंड फैबियो के लिए लिखती है। फैबियो हर महीने की 10...

मून 2009 में ईरान से मैसूर बीए करने आई करने आई थीं। जब पढ़ाई में मन नहीं लगा और बीए भी नहीं हो पाया तो नकली डिग्री बनाकर...
24/06/2017

मून 2009 में ईरान से मैसूर बीए करने आई करने आई थीं। जब पढ़ाई में मन नहीं लगा और बीए भी नहीं हो पाया तो नकली डिग्री बनाकर घर भेज दी और यहां काम करना शुरू कर दिया। ईरान इसलिए वापस नहीं गईं क्योंकि डर था कि वहां नौकरी के लिए एप्लाय करते हुए डिग्री की पोल न खुल जाए। पांच साल बाद जब वीजा खत्म हुआ तो वापस ईरान जाना पड़ा, लगभग एक साल तक ईरान में रहने के बाद जब मन नहीं लगा तो इस साल जनवरी में मून फिर इंडिया आ गईं।

loading…   ‘मेरा नाम मून है, मैं अपने आप को चांद से बहुत जुड़ा मानती हूं। मेरा मानना है कि जैसे दिन और रात हैं वैसे ही इस ब्रह्माण्ड के दो पहलू है। एक...

सबसे पहले हमारे पास एक जर्मन लड़की आई और किराए पर कमरा मांगा। हमारे पास कमरा नहीं था, तो उसने कहा कि कच्चा वाला ही दे दो...
23/06/2017

सबसे पहले हमारे पास एक जर्मन लड़की आई और किराए पर कमरा मांगा। हमारे पास कमरा नहीं था, तो उसने कहा कि कच्चा वाला ही दे दो, वही चाहिए। तब मैंने उसे एक रूपए रोज पर कच्चा वाला कमरा दे दिया। उन लोगों को कच्चे घर बहुत पसंद आते थे, वे लोग ऐसा कमरा मांगते थे जहां आस-पास भैंसे बधीं हो, भेड़ें हों, विदेशियों को यह अच्छा लगता था।

70 साल के वीरसिंह दद्दू के मक्लॉडगंज से ऊपर वाले गांव भागसूनाग में 15 कमरे किराए पर चलते हैं, एक रेस्टोरेंट भी है। बच्चे पढ़े-लिखे हैं, वे ही सब काम देखते हैं। दद्दू सवेरे शाम 2-2 पैग...

फेलिक्स को दिल से आवाज आई थी कि जिंदगी में प्रेम आने वाला है लेकिन वह कोलीन ही होगी, यही नहीं सोचा था। फीलिक्स उन दिनों ...
21/06/2017

फेलिक्स को दिल से आवाज आई थी कि जिंदगी में प्रेम आने वाला है लेकिन वह कोलीन ही होगी, यही नहीं सोचा था। फीलिक्स उन दिनों साधु थे, गेरूए कपड़े और पगड़ी पहनते थे। उन्हें यह बहुत कूल लगता था। ‘लेकिन मैं बहुत अच्छा साधु नहीं था।’ फेलिक्स अपने उन दिनों के बारे में बताते हैं।

स्कॉटलैंड के फेलिक्स और इंग्लैंड की कोलीन सबसे पहले गोकरणा में मिले, लेकिन यह सिर्फ मुलाकात ही थीमामला अभी शुरू नहीं हुआ था। फीलिक्स को तो कोलीन पहली ही नजर में पसंद आ गई...

जैसे मैं अब जानता हूं कि इसे कीचड़ बिल्कुल नहीं पसंद है, कीचड़ में जाते ही मनचले घोड़े की तरह मचल जाती है। एक दिन कीचड़ म...
19/06/2017

जैसे मैं अब जानता हूं कि इसे कीचड़ बिल्कुल नहीं पसंद है, कीचड़ में जाते ही मनचले घोड़े की तरह मचल जाती है। एक दिन कीचड़ में ले गया तो पहिया घूम-घूम जाए लेकिन ये एक फिट भी आगे न बढ़े। कभी इधर फिसल जाए कभी उधर। मैंने कहा चलो भाई जाना जरूरी है, दूसरा रास्ता बहुत लम्बा है लेकिन इसे कहां मानना था। मुझे भी कहां मानना था, इधर जोर का एक्सीलेटर दिया और उधर पिछला पहिया जोर से घूमा लेकिन ये बात इनको पसंद आई, मुझे नीचे गिरा दिया और खुद लेट गईं। बोली अब उठाके दिखाओ मुझे। जैसे-तैसे बीच कीचड़ में मनाया-उठाया दूसरे रास्ते से आया।

मुझे भोपाल छोड़े हुए चार महीने से ज्यादा हो चुके हैं। अकेले ही निकला था लेकिन अब सोचता हूं मैं अकेला नहीं निकला था, मेरे साथ मेरी मोटरसाइकिल भी निकली थी। आज-कल मैं अपने...

22/02/2016

दोस्तों कैफ़े फितूर को इस बार मैं नई तरह से शुरू करना चाहता हूं। कई लोगों से बात करने के बाद और ज़रूरत को समझते हुए मैं लगभग इस निर्णय पर पहुंचा हूं कि कैफ़े फितूर को एक बड़ी सी लाइब्रेरी की तरह शुरू किया जाए जहाँ छोटा सा कैफ़े भी हो।
- इस लाइब्रेरी में आप पसर कर बैठ पाएंगे।
- मन करे तो स्मोकिंग ज़ोन में सुट्टा भी फूंक पाएंगे।
- साइलेन्स का कोई बोर्ड नहीं होगा।
- एक वर्क स्टेशन की तरह आप दिन भर बैठकर काम भी कर सकेंगे।
- पढ़ते हुए या काम करते हुए आपको कॉफ़ी या सैंडविच भी मिल जायेगा।
- जब पढ़ते पढ़ते थक जाएँ तो हेड मसाज भी मिलेगी ( ये मज़ाक था )

ख़ैर ये सारी बातें तो इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर की हैं, इनसे भी महत्वपूर्ण कई और बातें हैं जो जल्द ही साझा की जाएँगी।
---------------
तो काम की बात यह है कि इतना बड़ा और ज़रूरी काम करने के लिए मुझे कई दोस्तों की मदद की ज़रुरत होगी। अगर आपको लगता है कि भोपाल में ऐसी कोई जगह होनी चाहिए और आप इसमे किसी भी तरह की मदद कर सकते हैं तो मुझे व्हाट्सएप करें, मेल करें या फिर मैसेज करें।

sadaiv ranjan
mo. 8871138135
[email protected]

10/04/2015

With the proliferation of CAFE FITOOR ,we understand the importance of providing the people of our community with an alternative. making sure we avoid the corporate mentality by focusing instead on what our community needs is not only what we * WANT * to do .it is also what we understand our responsibility as a local ,independent establishment .our regulars,love that we offer good quality of food ,support local artists and musicians through our weekly shows and encourage constructive .open discourse about ways to positively impact the cultural ,environmental and economical aspects of our city . we hope that the end result is that you feel you are a part of something special and are proud of what you are supporting......

COME BECOME OUR AMICI !!!!!

19/02/2015

Address

Boat Club
Bhopal
462013

Opening Hours

Monday 6am - 11pm
Tuesday 6am - 11pm
Wednesday 6am - 11pm
Thursday 6am - 11pm
Friday 6am - 11pm
Saturday 6am - 11pm
Sunday 6am - 11pm

Telephone

9691825361

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Cafe Fitoor posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category